गुनहगार – Hindi Sex thriller Novel

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Fuck_Me
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Re: गुनहगार – Hindi Sex thriller Novel

Unread post by Fuck_Me » 29 Sep 2015 05:25

“स्नेहा डॉक्टर को फोन करो और उसे कहो के जल्दी से आए” …. प्रियंका ने फ़िकरमंद आवाज़ मैं कहा और स्नेहा डॉक्टर को फोन करने लगी. थोड़ी दायर बाद डॉक्टर ने आ कर अंकुश का चेक उप क्या और फिर वो तीनों कमरे से बाहर आ गये

“म्र्स.अंकुश घबराने के कोई बात नही जो ख़तरा था वो तू ताल गया हा, लायकेन अभी भी बुहुत सावधान रहना होगा, एन्को ऐक हल्का सा अटॅक आ चुका और भगवान ना करे अगर फिर से एनके तबीयत ज़्यादा खराब हो गयी तू एस बार सीरीयस अटॅक भी आ सकता हा” …. डॉक्टर ने प्रियंका को तफ़सील से बताते हुवे कहा

“लायकेन डॉक्टर ये जो एन्हैइन दोराय पर रहे हैं बार बार होश मैं आते हैं और फिर से चीख मार के बेहोश हो जाते हैं, ये कब तक चले गा ऐसा मुझ से एनके ये हालत देखी नही जाती” ….. प्रियंका ने दुख भरे लहज़े मैं कहा

“म्र्स.अंकुश असल मैं एन्हैइन कोई बात हा या कोई वक़ीया हा जो बार बार याद आ रहा हा और जब भी ये होश मैं आते हैं एनके दिमघ मैं वो बात फिर से घूमने लगती हा और ये बेहोश हो जाते हैं, एसका एलाज़ सिर्फ़ आराम हा जो एन्हैइन करना हा एस वक़्त ये जितना ज़्यादा सोए रहण गे उतना अछा हा, कुछ दिन मैं ये दोबारा नॉर्मल हो जाएँ गे लायकेन अगर हम ने एस समय एनके दिमघ पे ज़ोर डायने के कोशिश के या एन्हैइन होश मैं रखने के कोशिश के तू उसका नतीजा बुहुत संगीन निकल सकता हा” ….. डॉक्टर ने ऐक बार फिर से तफ़सील से प्रियंका को समझाया

“ठीक हा!, लायकेन मुझे फिकेर हो रही हा और हुमैन पता भी नही हा के क्या हुवा हा, ये तू ऑफीस गये थे 2 दिन पहले मेरे बेटी स्नेहा के माँगनी थी लायकेन फिर वहाँ से एनके सीकरेटरी ने फोन कर के बताया के एँकी तबीयत खराब हो गयी और तब से अब तक यही हालत हा, कुछ पता भी नही चल रहा के हुवा क्या हा” ….. प्रियंका जैसे खुद अपने आप से बताईं कर रही थी

“परेशन ना हों म्र्स.अंकुश, भगवान ने चाहा तू 1,2 दिन मैं मिस्टर.अंकुश बिल्कुल ठीक हो जाएँ गे” ….. डॉक्टर उन्हइन तसली दे कर वहाँ से चला गया

“मामा आप परेशन ना हों, पापा ठीक हो जाएँ गे अगर आप एसए तरहन परेशन रहीं तू मुझे दर हा कहीं आपके तबीयत खराब ना हो जाए” … स्नेहा ने प्रियंका का हाथ पाकरते हुवे कहा

“कैसे परेशन ना हों बेटा, ऐक तरफ तुम्हारे माँगनी रोकना पड़ी, फिर तुम्हारे पापा के तबीयत खराब हो गयी और रोहन का भी कुछ पता नही वो कहाँ हा, किस किस बात पे परेशन ना हों” ….. प्रियंका वहीं रखे सोफे पे बेठ गयी, जैसे वो तक गयी हो

“मामा मैने बताया तू था आपको मेरे बात हुवे थी रोहन से उसको किसी ज़रूरी कम से शहेर से बाहर जाना परा हा एस लाइ वो नही आया” …. स्नेहा ने प्रियंका को तसली डाइते हुवे कहा

“कैसा ज़रूरी काम बेटा?? .. तुम दोनो के माँगनी होने वाले थी वो रुक गयी, तुम्हारे पापा की तबीयत एतने खराब हा, एस समय और कोन सा ज़रूरी कम हो सकता हा?? .. मुझे तू बुहुत अजीब लग रहा हा रोहन का ये बर्ताव” ….. प्रियंका के आवाज़ मैं फिकेरमांडी सॉफ सुनी जा सकती थी

“मामा मैं आज फिर रोहन से बात कराती हों, आप फिकेर ना कारण मैने कल भी कोशिश के थी उसका नंबर ऑफ था” …. स्नेहा ने उन्हइन तसली दी.

दिल तू स्नेहा का भी ये बात नही मन रहा था के ऐसी हालत मैं उन्हइन चोर कर रोहन को और कोन सा ज़रूरी कम हो सकता हा. माँगनी के दिन जब उसे अपने पापा के तबीयत का पता चला था तू उस ने रोहन को फोन क्या लायकेन उसका नंबर ऑफ था फिर उन्हइन हॉस्पिटल जाना परा एस डॉरॅन वो मुसलसल रोहन को फोन ट्राइ कराती रही लायकेन उसका नंबर उसे ऑफ मिला, फिर रात को कहीं जा के उसका फोन आया जिस मैं उस ने बताया के उसके कंपनी के किसी ज़रूरी कम से मुंबई से बाहर जाना परा हा और वो 2,3 दिन मैं वापस आ जाए गा उस ने फोन पर ही अंकुश के तबीयत का उस से पूच लया था. स्नेहा उस वक़्त अपने पापा के तबीयत को ले कर एतने परेशन थी के वो और कुछ सोच ना सकी लायकेन बाद मैं उसे ख़याल आया के उस दिन तू उनके माँगनी होने वाले थी फिर रोहन कैसे जा सकता हा किसी काम से वो भी उन्हइन बिना बताए, उसके दिल मैं भी बुहुत सारे सवाल जानम ले रहे थे लायकेन फिलहाल वो अंकुश के तबीयत और प्रियंका के परेशानी को देखते हुवे कुछ नही बोल रही थी. प्रियंका और स्नेहा दोनो अपने अपने सोचों मैं उलझे हुवे थे के एतने मैं उनके सोच का बहायो नोकेर के आवाज़ ने थोड़ा

“मैं साहब ! बाहर कोई औरात आए हा और वो कह रही हा के उसे आप से मिलना हा” …. नोकेर ने प्रियंका को आ कर बताया

“कोन हा??.. नाम नही बताया उन्हों ने अपना” …. प्रियंका ने पूछा

“नही जी … बस यहे कहा हा के वो आप से मिलना चाहते हैं” ….

“ठीक हा अंदर भाईज दो” ….. प्रियंका ने ऐक लंबी सांस लायटे हुवे कहा. और थोड़ी दायर बाद ऐक औरात ड्रॉयिंग रूम मैं दाखिल हुवे उस ने हल्के सब्ज़ रंग के बुहुत खूबसूरात सरही पहनी हुवे थे, उसके उमेर लग भाग 45 साल के करीब थे और पहली नज़र मैं हे देख के लगता था के अपने जवानी मैं वो बुहुत सारे लोगों के दिल धारका चुकी होगी

“नमस्ते !” …. उस औरात ने अंदर आ कर बस एट्ना कहा

“नमस्ते ! .. जी आप कोन मैने आपको पहचाना नही” …. प्रियंका और स्नेहा दोनो उसके आने के साथ ही खड़ी हो गये थाइन

“जी ! जानती हों ये हमारे पहली मुलाक़ात हा, मेरा नाम संजना सिंग हा” ….. उस औरात ने अपना इंट्रोडक्षन दया. प्रियंका और स्नेहा दोनो ऐक दूसरे को देखने लगीं जैसे वो पूच रहे हों ऐक दूसरे से के वो कोन हा, लायकेन दोनो के चहरे के भाव बता रहे थे के वो उस औरात को नही जानतेन ……

अगले 2 दिन मैं अंकुश के तबीयत काफ़ी संभाल चुकी थी, अब उसे बेहोसी के दोराय नही पर रहे थे लायकेन अभी उसके तबीयत पूरे तरहन संभाली नही थे वो काफ़ी कमज़ोरी महसूस कर रहा था शायद जिस्म से ज़्यादा उसका दिमघ तक चुका था कितने हे सोचैईन थाइन जो उसके दिमघ मैं आए थाइन उन 2 दिनों मैं और सब से बरह वो ऐक वक़ीया जो एतने बार उसके दिमघ ने दोहराया था के अब वो अंखाईं भी बंद कराता तू फिल्म के तरहन उसके आँखों के सामने चलने लग जाता लायकेन फिर भी वो वक़ीया जब उस ने वो सीडी अपने लॅपटॉप मैं लगाए थे उसके दिमघ से निकला नही था, और जैसे हे वो अंखाईं बंद कराता फिल्म के तरहन वो उसके सामने चलने लग जाता.

“सीडी की शुरुवत मैं स्नेहा के कुछ क्लिप्स थे, जिस मैं कहीं पे वो खाना खा रही थी, कहीं पे बेड पे लैयती हुवे थी, कहीं पे सोफे पे बेठी थे, एसए तरहन के बुहुत सारे क्लिप्स थे जो रेकॉर्ड क्ये गये थे, लायकेन उन मैं कोई भी ऐसी बात नही थी जिसे देख कर कुछ अजीब लगे लायकेन 15 मिनिट के एन क्लिप्स के बाद जो चहरा उसे नज़र वो उसके लाइ काफे हैरान कन था, वो कोई और नही रोहन था” …

“हेलो मिस्टर.अंकुश देव, कैसे हैं आप??, अफ़सोस हा मुझे के एस तरहन मुझे ये सीडी मैं रेकॉर्डिंग कर के ये सब आपको भाज्ना पर रहा हा, असल मैं तू ये बताईं मैं आपके सामने बेठ कर करना चाहता था लायकेन क्या कारों आख़िर सीडी का हे सहारा लेना परा, अभी आप ने कुछ क्लिप्स देखन हों गे स्नेहा के शायद आपको समझ नही आ रही के एन क्लिप्स को भाजने का मक़सद क्या हा आपको, तू मैं समझता हों ये क्लिप्स आपको ये समझने के लाइ हैं के ये तू सिर्फ़ ऐक ट्रेलर हा जो मैने दिखाया हा असली फिल्म तू मेरे पास हा, वो क्या हा के मैं कितना कमीना एंसन नही हों के ऐक बाप को उसके बेटी के जिस्म के वो हिसे दिखायों के जिसके बाद वो अपने बेटी से तू क्या खुद से भी नज़रैयण ना मिला सके, तू ये सिर्फ़ आपको समझने के लाइ हा के मेरे पास स्नेहा का जिस्म का हर वो हिसा रेकॉर्डेड हा जो शायद आपके ेज़ात का जनाज़ा निकालने के लाइ काफ़ी हा. मेरा ख़याल हा यहाँ तक तू आपको बात अच्छे तरहन समझ आ गये होगे”

“अब आते हैं दूसरे सवाल की तरफ मैने ये क्यूँ कर रहा हों ??, तू मिस्टर.अंकुश मेरा पूरा नाम हा रोहन सिंग देव, सोन ऑफ मिस्टर.अंकुश देव और संजना सिंग देव, कुछ याद आया ??, मेरा ख़याल हा याद आ गया हो भले हे आप काइन हे खुद घरज़, मतलब परास्त, या गिरे हुवे एंसन क्यूँ ना हों कम आज़ कम संजना सिंग को तू नही भूले हों गे वो औरात जिस ने आज आपको यहाँ तक फुँचने मैं सब से एहम किरदार अदा क्या. जी मैं उसे औरात का बेटा हों, आपका एस लाइ नही कहा के आपका बेटा कहलवाना मेरे लाइ ऐक शरम से ज़्यादा कुछ नही. मैं 5 साल पहले मैं अमेरिका से इंडिया आया था ये सपना ले कर के मैं उस शख्स के ज़िंदगी बर्बाद कारों गा जिस ने मेरे मन के साथ वो सब कुछ क्या जिस ने मेरे मन को ऐक जीती जागती लाश बना दया हा, आप जानते हैं बचपन से मैने अपने मन के होंतों पर ऐक खामोशी देख रहा हों, वो रातों को उठ उठ कर रोटी थी, उसके ज़िंदगी मैं घूम का ऐक मौसम था जो ठहर सा गया था और मैं हमेशा सोचता था के वो कोन हा जिस ने मेरे मन के साथ एट्ना बरा ज़ुल्म क्या हा. बचपन से हे मेरे बाप के खाने मैं अंकुश देव का नाम लिखा मैने देखा लायकेन कभी उस एंसन को नही देखा जो मेरा बाप था, जब मैं दूसरे बचों को उनके बाप के साथ देखता था तू मैं अपने मन से लार पराता था के मेरा बाप किधेर हा, वो क्यूँ नही बताती मुझे अपने बाप के बड़े मैं, लायकेन एस सवाल के जवाब मैं मेरे मन के पास सिर्फ़ खामोशी होती थे. फिर मैं बरा होता गया तू मैने सोचा एन सारे सवालों का जवाब मैं खुद ढुण्डों गा लाय केन मुझे उसके लाइ ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़ी मूमी के दोस्त जिसके साथ हम रहते थे उन्हों ने मुझे सब कुछ बता दया के कैसे आप ने मेरे मन के ज़िंदगी बर्बाद की, उस दिन से मैने ये फ़ैसला क्या था के मैं आप से उस सब का बदला ज़रूर लोन गा जो आप ने मेरे मन के साथ क्या हा”

“इंडिया आ कर मुझे ये समझ नही आ रही थी के वो कोन सा तरीका हा जिसके ज़रिए मैं आपको एस हद तक नुकसान फुँछ सकता हों के आपको वो दुख अंदर तक महसूस हो, पैसा आप एट्ना कमा चुके थे शायद आपके कंपनी मैं कोई जॉब कर के मैं कोई नुकसान फुँचा भी देता आपको तू आपके लाइ वो एट्ना तकलीफ़ दाह ना होता. फिर मुझे पता लगा के आपके जान तू आपकी गौड़ ली हुवे बेटी मैं हा तू मेरे लाइ सब कुछ सॉफ हो गया. स्नेहा तक फुँचना एट्ना आसान ना था बुहुत मेहनत करनी पड़ी मुझ एस सब मैं लायकेन आख़िर कार मैं उस तक फुँचने मैं कामयाब हो गया और उसके ज़रिए आप तक और आज एस सारे प्लान का फाइनल सीन हा”

“तू मिस्टर.अंकुश देव अब आप ये सोच रहे हों गे एस सीडी भाजने के मक़सद क्या हा तू वो मक़सद तू अब तक आप समझ गये हों गे या फिर नही समझे ??, चलन मैं समझा देता हों. आप अपने जान से प्यारी बेटी जिस के आँख मन आप आँसू भी नही देख सकते उसे ये बताईं गे के उसका बाप कितना गिरा हुवा और कमीना एंसन था जिस ने अपने ज़िंदगी मैं अपने साइवा किसी और के बड़े मैं नही सोचा, रोहन सिंग कोन हा और वो क्यूँ स्नेहा को चोर कर चला गया यानी के अपने बेटी की मोहब्बत और ज़िंदगी के बर्बादी के ज़िमयदार आप खुद हैं और ये बात आप अपने मौन से ही बताएँ गे अपने बेटी को और जब आप अपने बेटी के आँखों मैं वो दुख देखैईं गे तू शायद आपको एहसास हो के संजना सिंग के साथ आप ने क्या किया था और वो किस दुख मैं से गुज़री होगी. खैल वोे पूरेाना हा मिस्टर.अंकुश देव बस सिर्फ़ खिलाड़ी बदल गये हैं. मैं आपको सिर्फ़ 1 दिन का समय देता हों अगर अगले 24 घंटे मैं ये सब कुछ आप ने स्नेहा को नही बताया तू वो क्लिप्स जिन का ज़िकेर मैने पहले क्या था वो दुनिया के हर पॉर्न साइट के पास फुँछ जाएँ गे और शायद आप अपनी बेटी के साथ ये होता तू नही देखना चाहान गे, मैं मानता हों के ये ठीक नही हा स्नेहा के साथ ज़्यादती हा लायकेन बाप की करनी की सज़ा तू बेटी को भुगतने ही पड़ी गी, दोनो सुर्तों मैं हार उसी के हा और उसके हार मतलब आपकी हार, उमीद कराता हों के मुझे ये खुशी की खबर जल्द ही मिले गी के स्नेहा ….. ”

“स्नहााआआआआआआआआआआ ! ” ….. उसके सोच मैं अभी वो सीडी चल ही रही थी के स्नेहा के ख़याल से ऐक ज़ोरदार चीख उसके मौन से निकल गये. और कुछ ही पल बाद स्नेहा कमरे मैं आ गयी

“क्या हुवा पापा ??, आप ने एतने ज़ोर से मेरा नाम क्यूँ लया” …. स्नेहा उनके पास बेठ कर फ़िकरमंडी से पूछने लगी

“क … क …. कुछ नही, बस तुम्हेँ देखने का दिल कर रहा था” …. उन्हों ने प्यार से उसे देखते हुवे कहा

“स्नेहा क्या तुम्हारे रोहन से कोई बात हुवे हा, वो कहाँ हा?” ….. अंकुश ने पूछा

“जी पापा ऐक दफ़ा बात हुवे थे लायकेन कल रोहन के मूमी आए थाइन हमारे घर” ….. स्नेहा ने जैसे कोई बॉम्ब फॉर दया था उन पे

“रोहन के मूमी … कब किस टाइम आए थाइन, तुम ने मुझे मिलवाया क्यूँ नही उन से” ….. अंकुश के हालत ऐसी हो रही थी जैसे वो उर कर संजना के पास फुँचना चाहता हो

“आप के तबीयत ठीक नही थी आप सो रहे थे, लायकेन उन्हों ने कहा के वो फिर से आएँ गे” ….. स्नेहा ने उनके हालत देखते हुवे कहा

“वो अपना कोई अड्रेस बता के गये हैं ??” ….. अंकुश ने जैसे स्नेहा की बात सुनी ही नही

“बताया हा ना, लायकेन पापा आपको हैरात नही हुवे रोहन के मूमी का सुन कर, उस ने तू कहा था के उसके मन बाप का दिहाथ हो गया था बचपन मैं” …. स्नेहा ने उलझे हुवे लहज़े मैं कहा, और उसके बात सुन कर जैसे ऐक दर्द सा उठा था अंकुश के सीने मैं

“हाँ, हुवा ना, …. बुहुत हैरंगी हुवे मुझे, यहे तू पूछने जाना हा के उस ने ये झूट क्यूँ बोला” ….. अंकुश ने बात को संभालने के कोशिश की

“वो कह रहे थाइन के 5 साल पहले, रोहन का उन से कोई झगरा हुवा और वो उन्हइन अमेरिका चोर कर इंडिया आ गया और अब बड़ी मुश्किल से उन्हों ने ढूनदा हा उसे” …. स्नेहा ने उन्हइन बताया

“स्नेहा तुम वो अड्रेस ले कर आयो, मुझे अभी उन से मिलने जाना हा” ….. अंकुश ने जैसे उसके बात सुनी नही या ये सब जानकारी शायद उसके लाइ ज़रूरी नही थी

“लायकेन पापा आपके तबीयत ठीक नही हा, और वो आएँ गे ना खुद दोबारा” ….. स्नेहा ने जैसे उन्हइन समझना चाहा

“मैं ठीक हों तुम मेरे फिकेर ना करो” …. अंकुश ने उसके बात उन-सुनी कर दी. उसे हालाँकि बुहुत तकलीफ़ हो रही थे उठने मैं लायकेन फिर भी वो हिम्मत कर के गारी तक फुँछ गया. स्नेहा और प्रियंका दोनो ने उसके साथ आने का कहा लायकेन उस ने उन दोनो को माना कर दया.

गारी स्नेहा के बताए हुवे अड्रेस के तरफ बरह रही और उस मैं बेठा अंकुश ये सोच रहा था के क्या ये सब रोहन ने संजना के कहने पे क्या या फिर उसे भी पता नही एस सब का, सीडी मैं रोहन ने उसे 1 दिन का समय दया था अब तू उस बात को काफे दिन गुज़र चुके हैं क्या उस ने वो सब कर दया जिसके उस ने धमकी दी थी सीडी मैं. नही संजना मैं तुम्हारे पैरों मैं गिर कर माफी माँग लोन गा लायकेन मेरे क्ये के सज़ा मेरे बेटी को ना देना, वो ये घूम बर्दाश्त नही कर पाए गी. गारी रुक चुकी थी, अंकुश ने सिर उठा के देखा तू वो स्नेहा के बताए हुवे अड्रेस पे फुँछ चुका था. आज एतने सालों के बाद वो फिर से संजना के सामने होगा लायकेन आज हालत बदल चुके थे, कुछ साल पहले संजना उस से अपने प्यार के भीक माँग रही थी और आज वो अपने बेटी के प्यार की भीक उसे औरात से माँगने आया था …….

आज एतने साल के बाद ऐक बार फिर संजना उसके सामने थे, उस ने कभी सोचा भी नही था के ज़िंदगी मैं दोबारा कभी उसे संजना का सामना करा परे गा और वो भी एन हालात मैं जब वो किसे हारे हुवे जुवरि के तरहन उसके पास अिखड़ी उमीद ले कर आए गा. वो उसके सामने बेठी थी लायकेन उसके पास अल्फ़ाज़ जैसे ख़त्म हो गये थे

“संजना मैं बुहुत शर्मिंदा हों अपने किए पर लायकेन स्नेहा …. ” …. वो अभी बोल ही रहा था के संजना ने उसके बात काट दी

“मैं जानती हों स्नेहा का एस मैं कोई दोष नही हा और रोहन ने जो भी क्या मुझे उसका पता नही था, 5 साल पहला वो इंडिया आया मुझे तब भी शक परा था के वो शायद तुम्हारे पीछे आया हो क्यूँ की बचपन से ही वो तुम से बुहुत शदीद नफ़रात कराता हा हालाँकि मैने उसे कभी तुम्हारा कोई बुरा खाका बना के उसके सामने पेश नही क्या लायकेन वो बचपन से ही आम बचों से ज़्यादा समझदार हा और फिर मेरे दोस्त पूजा जिसके साथ मैं रहती हों अमेरिका मैं उस ने उसे सा बता दया तू उसके ज़िंदगी का लक्ष ही शायद तुम से बदला लेना था, लायकेन मुझे एस ने कभी एस बात का ज़रा सी भी खबर नही लगने दी” ….. संजना ने बोलते बोलते वक़फा लया, जैसे वो तक गयी थी बोलते बोलते

“एंसन शायद जितना बरा बन जाता हा उसके लाइ छुपना उतना मुश्किल हो जाता हा, तुम जैसे माशूर बिज़्नेसमॅन को ढूनदना शायद कोई मुस्किल काम नही और रोहन ने तुम्हेँ ढुंड लया इंडिया आ कर” …. अंकुश को लगा जैसे संजना ने बात नही के चाबुक (हंटर) मारा हो उसे

“लायकेन जो कुछ भी उस ने क्या मैं उसके एज़ाज़त कभी नही दे सकती, मुझे अफ़सोस एस बात का हा मुझे ये सब कुछ बुहुत दायर से पता लगा, जब वो सब कुछ कर चुका था तब मुझे पूजा ने बताया के वो क्या कर चुका और क्या करने वाला हा, तू मैं फॉरन इंडिया आ गयी” …. सनजान ने ये कह कर ऐक गहरा साँस लया

“संजना, जो कुछ भी हुवा उस सब मैं मेरा कसूर हा मैं तुम्हारा और रोहन का मुजरिम हों लायकेन स्नेहा वो बुहुत मासूम हा उसका एस सब मैं कोई क़सूर नही हा” …. अंकुश के आवाज़ मैं शिकस्त वज़िया थी

“कभी कभी क़सूर ना होते हुवे भी सज़ा भुगतनी पर जाती हा” …. संजना के आवाज़ मैं गुज़रे वक़्तों का दुख बोल रहा था और अंकुश को लगा जैसे ऐक और चाबुक उसके जिस्म पे लगा हो

“तुम फिकेर ना करो रोहन ऐसा कुछ नही करने वाला मैने उसे समझा दया हा और मेरे बात वो कभी नही टालता, स्नेहा के साथ ऐसा कुछ नही होगा जैसा तुम सोच रहे हो” … संजना के आवाज़ मैं ममता का फखार बोल रहा था जो उसे अपने बेटे पे था

“संजना मैं तुम्हारा ये एहसान …. ” … अंकुश को समझ नही आ रही थी के वो कैसे उसका शुकरिया अदा करे

“एहसान नही हा अंकुश देव, ना ये तुम पे एहसान हा ना और ना किसी और पे, मैं एटिहास को ऐक बार फिर से दोहराना नही चाहती, मैं ऐक और संजना सिंग बनते नही देख सकती, जिस तकलीफ़ और दर्द से मैं गुज़री हों मैं नही चाहती के वो दर्द और तकलीफ़ ऐक और जीती जागती लड़की को पठार बना दे, आज स्नेहा उस जगा पे खड़ी हा जहाँ पे काए साल पहले संजना सिंग थी और मैं उसका भविश्र बर्बाद होते नही देख सकती, अगर ऐसा हो जाता तू मैं खुद को कभी माफ़ ना कर पाती” …. संजना के आवाज़ मैं गुज़रे वक़्तों का दर्द सॉफ महसूस क्या जा सकता और अंकुश को ऐसा लग रहा ता जैसे अब उस चाबुक पे आग उग आए हा जो उसके जिस्म को धारा धार जला रही हा

“तुम घर जयो और शादी की त्यारी करो, रोहन स्नेहा से मोहब्बत कराता हा एट्ना तू मैं जान गये हों और अगर ना भी कराता होता तू मैं ये शादी
ज़रूर कराती, तुम्हेँ वो माफ़ कर पता हा या नही एसके बड़े मैं कुछ नही कह सकती मैं ये ऐक बाप और बेटे का मामला हा उस मैं कुछ नही
बोलों गे मैं” … संजना के आवाज़ मैं एस बार ठहरायो था

अंकुश वहाँ से उठ के बाहर आ गया. आज ऐक बार फिर संजना ने उसके ज़िंदगी को बचा लया था, आज ऐक बार फिर उसे डूबने से बचा लया और ठीक
समय पे उसका हाथ थाम कर उसे आँधी खाई मैं गिरने से बचा लया.

“संजना, तुम ने ज़िंदगी भर सिर्फ़ मुझे दया और मैने सिर्फ़ तुम से लया हा, तुम्हारा हाथ हमेशा उपेर रहा और मेरा हाथ हमेशा नीचे, आज एट्ना
नाम, पैसा, शोहरात कमाने के बाद भी मैं ऐक भिकारी हे हों तुम्हारे सामने” … वो गारी मैं बेठा सोच रहा था

अगले हफ्ते मैं स्नेहा और रोहन के शादी के डटे फिक्स हो गयी, स्नेहा और प्रियंका से सारे राज़ छुपा कर ही रखे गये उनके पिछली ज़िंदगियों के क्यूँ के उनके लाइ यहे बहतर था के जितना वो कम जनन गे उतना हे कम उलझाईं गे. अंकुश ने काई बार रोहन से बात करने की कोशिश के पहले तू वो उन्हइन टलता रहा लायकेन आख़िर कार वो उन से बात करने पे राज़ी हो गया

“रोहन मैं जनता हों मैं तुम्हारा गुनहगार हों बुहुत ज़्यादती की हा मैने तुम्हारे मन और तुम्हारे साथ” … अंकुश के आवाज़ मैं अफ़सोस ही अफ़सोस था

“मैं आप से को लंबी बहस नही करना चाहता, ये एतने सालों का घूम, घुसा और दुख सिर्फ़ चाँद दिन या चाँद लफ्ज़ बोलने से ख़त्म नही हो सकता, मैं आप से कुछ वादा नही कर सकता लायकेन कोशिश कारों गा सब कुछ भूलने के और वो भी सिर्फ़ अपने मन के कहने पेर, लायकेन एस मैं कितना वक़्त लगे गा मैं कुछ नही कह सकता, आपको एन्ताज़ार करना होगा कितना ये मैं नही बता सकता” … उस ने ऐक हे जवाब मैं सब कुछ निपटा दया था और अंकुश जनता था के अब सिर्फ़ एन्ताज़ार हे उसकी क़िस्मत मैं हा के उस पे क़र्न एतने बरह चुके थे के उनको सूद समैट उतरना एट्ना आसान ना था

स्नेहा और रोहन के शादी को हुवे 2 हफ्ते गुज़रे थे, संजना ने अगले हफ्ते वापस अमेरिका जाने का प्रोग्राम बनाया था के वो अब मज़ीद यहाँ रुकना नही चाहती थी, वो सब अंकुश के बुंगलोव पे रह रहे थे. उस रात भी सब लोग डिन्नर के बाद साथ बेठे थे क्यूँ की स्नेहा के खाहिश थी के क्यूँ की वो कुछ दिन मैं सब को चोर कर अमेरिका जाने वाली हा तू वो सब के साथ ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त बिठाना चाहती थी.

“अछा मैं अब अपने रूम मैं जाता हों तुम लोग गुप शुप करो, मेरे मेडिसिन्स का टाइम हो चुका हा” … कुछ दायर बाद अंकुश ने कहा

“पापा बेठिए ना एट्ना मज़ा आ रहा हा” … स्नेहा ने लाद से कहा

“बेटा तुम अब अपने आंटी और पाती को तंग करो ना मुझे तू जितना तंग करना था कर लया तुम ने अब मुझे कुछ आराम करने दो” … अंकुश ने मुस्कुराते
हुवे कहा

अंकुश वहाँ से उठ कर उपेर अपने कमरे के तरफ बरह गया, कमरे मैं जाने से पहले उस ने ऐक बार मूर के अपने सारे परिवार को देखा और फिर अपने कमरे मैं घुस गया. वो सब लोग वहीं बेठे अभी भी बताईं कर रहे थे के अचानक ऐक आवाज़ से पूरा घर गूँज उठा….

डियर संजना,

कहाँ से शुरू कारों, बचपन से ले कर आज तक मैने सिर्फ़ अपने बड़े मैं ही सोचा हा और आज उमेर के एस हिसे मैं फुँछ कर जब मुझे एहसास हुवा हा के सिर्फ़ अपने लाइ जीना कोई जीना नही एंसन ज़िंदगी मैं तब ऐक कामयाब एंसन कहलाने के लायक़ होता हा जब अपने एलवा और लोग भी उसके कामयाबीओं पर फखार कारण और अफ़सोस के मेरे पास ऐसा कोई नही हा. क़सूर किस का हा उन मन बाप का जिन्हों ने मेरे भविश्र के लाइ मुझे अपने औक़त से बड़े स्कूल मैं परहया, उन बेहन भाइयों का जिन्हों ने हमेशा अपने से ज़्यादा मेरे परहाय को एहमियत दी या फिर उस लड़की का जिस ने ऐक जादू के चारी घुमाई और मेरे ज़िंदगी मैं सब कुछ बदल गया ??. क़सूर किसी का भी नही सिर्फ़ ऐक एंसन का हा जिसका नाम अंकुश देव हा जो ना मन बाप, ना बेहन भाई और ना ही उस लड़की की क़दर कर सका जिस ने उसे खुद से बरह कर मोहब्बत की. मेरी हर बात हमेशा मैं से शुरू हो कर मैं पर ख़त्म हुवे लायकेन ये मैं का ज़हेर मुझे एस हालत पे फुँचा दे गा मैने कभी सोचा ना था. आज मेरे पास सब कुछ हा डोलात, शोहरात, ेज़ात, लायकेन फिर भी लगता हा मुझ से बरा भिकारी कोई नही हा दुनिया मैं, आज मैं ये सोचता हों के अगर तुम ने रोहन को वो सब कुछ करने से ना रोका होता तू ये धन दौलत कुछ भी मुझे ना बचा पाती, दौलत से सब कुछ खड़ीदा जा सकता हा रिश्ते नही खड़ीदे जा सकते, क्या कराता मैं एस दौलत का अगर मैं अपने बेटी से नज़रैयण भी ना मिला पता. आज से काई साल पहले तुम ने मुझे कहा था के जिस दौड़ मैं शामिल होने जा रहा हों उसका कोई अंत नही हा और आज मुझे ये समझ आया हा के वाक़ई एसका कोई अंत नही हा मैने तब तुम्हारे बात नही समझी और तुम्हेँ खो दया और देखो आज मेरे पास कुछ भी नही हा आज भी मुझे तुम ने हे आ कर बचाया हमेशा की तरहन, अगर उस समय मैं तुम्हारे बात समझ जाता तू शायद एतनी दौलत तू ना कमाता पर ऐक सुखी ज़िंदगी गुज़र रहा होता जिस मैं शायद पछटवे बुहुत कम होते लायकेन ये काश अब खलिश का वो काँटा बन चुका हा जो मेरे दिल मैं चब गया हा और जिसका दर्द हर गुज़राते पल के साथ बर्हता जा रहा हा.

संजना मैं बुहुत तक गया हों मुझे अब आराम चाहये मेरे लाइ ज़िंदगी हर गुज़राते पल के साथ ऐक भोज बनती जा रही हा और मुझे एस से मुक्ति चाहये अब. मैं जनता हों के रोहन स्नेहा का बुहुत ख़याल रखे गा और तुम तू मोहब्बत के वो देवी हो जो सिर्फ़ मोहब्बत करने के एलवा और कुछ नही जानती, जब तक तुम ये खत पारह रही होगे मैं एस दुनिया को चोर कर जा चुका हों गा, मेरे लाइ तू अब ये दुनिया भी नरख बन चुकी हा जिस मैं पल पल मैं मार रहा हों तू एस से अछा हा मैं अपने लाइ वो नरख चुन लूँ जिस मैं मुझे सिर्फ़ जलना हा वहाँ पे कम आज़ कम मुझे अपना गुज़रा हुवे कल के खलिश तू नही तर्पाए गी. मेरे मौत स्नेहा और प्रियंका के लाइ बुहुत बरा धज्क होगी लायकेन मुझे पता हा के वक़्त के साथ साथ वो दोनो संभाल जाएँ गी और तुम सब को संभाल लो गी, देखो ना मेरे खुद घारज़ी जाते जाते भी सारा भोज तुम पे डाल के खुद को आज़ाद कर रहा हों लायकेन क्या कारों ये खुद घारज़ी तू मेरे फ़ितरात बन गयी हा अब.

तुम्हेँ मैं क्या कहों मैं तू तुम से माफी माँगने के लायक़ भी नही हों लायकेन हो सके तू मुझे माफ़ कर देना और मेरे बाद स्नेहा का बुहुत ख़याल रखना उस मैं मेरे जान बसी हा और रोहन से कहना के हो सके तू वो अपने एस बाद-नसीब बाप को माफ़ कर दे जिस ने उसके पैदा होने से पहले ही उसके सिर से बाप का साया चीन लया. संजना ऐक आखड़ी विनती थी तुम से रोहन और स्नेहा के औलाद की परवरिश मैं कहीं मेरी हल्की से परचाय भी ना परने देना, मैं जनता हों के रोहन और स्नेहा बुहुत अच्छे माता पिता साहबित हों गे लायकेन फिर भी ये मेरे आखड़ी खाहिश समझ लो और अपना बुहुत ख़याल रखना मैं कभी तुम्हारी मोहब्बत का हक़ अदा नही कर सका और हमेशा के तरहन मेरे पास तुम्हेँ डायने के लाइ कुछ भी नही हा. ये सफ़र जो मैने अपने ऐक वक़्ती शर्मिंदगी को ख़त्म करने के लाइ ऐक छोटे से झूट से शुरू क्या था आज एस ऐक बड़े सच पे ख़त्म हुवा के झूट, खुद घारज़ी, बनावटी शान, दौलत, शोहरात कुछ भी एंसन के काम नही आती आख़िर मैं कुछ काम आता हा तू रिश्ते, प्यार और अपना-पं.

तुम्हारा गुनहगार अंकुश देव

संजना ने जब लेटर ख़त्म क्या तू उसके आँखों से आँसू एतने तैइज़ी से बह रहे थे के उन आँसुयों के वजा से खत पे काए लफ्ज़ मिट चुके थे. अंकुश के आत्मा हत्या कारण के 1 हफ्ते बाद उसके वकील ने ये खत उसे दया था के अंकुश ने ये खाट ख़ास उसके लाइ दया और कहा हा के एसके बड़े मैं किसी को भी ना बताया जाए. संजना ने लेटर अपने अलमारी मैं संभाल लया और अंकुश के फूल छारही तस्वीर के सामने खड़ी हो गयी

“तुम ने मेरे साथ कभी एंसाफ़ नही क्या और देखो आज भी तुम ने यही किया, मैने ऐसा तू कभी नही चाहा था आ.द मैं तुम से कभी नफ़रात कर ही ना पाई तुम से दूर जाने के वजा भी यही थी के मुझे पता था के मैं तुम से नफ़रात नही कर पयों गी लायकेन तुम्हारे वो कहे गये अल्फ़ाज़ मुझे अंदर ही अंदर मराते रहण गे लायकेन तुम ने सारे फ़ैसले अकेले ही कर लाइ लायकेन मैं वादा कराती हों के तुम्हारे उस आखड़ी खाहिश को ज़रूर पूरा कारों गी और अपने आने वाली नस्लों मैं ऐसी किसी कमी को परवान नही छरहने डॉन गी जो उनकी आने वाली ज़िंदगी मैं उन्हइन ऐक कमज़ोर एंसन बनाएँ और जिस खलिश के काँटे ने तुम्हेँ अपनी ज़िंदगी लेन पे मजूर क्या शायद तब जा के उसका दर्द कुछ कम हो और तुम्हारी आत्मा को शांति मिले”

संजना ने अंकुश के तस्वीर को चुवा जैसे वो उसे चूना चाहती हो और अपने आँखों से आँसू सॉफ कर के कमरे से बाहर चली गयी जहाँ उसका परिवार उसका एन्ताज़ार कर रहा था.

सुनू!
वफ़ा की दास्ठान-ए-घूम चलो तुम को सुनते हैं
जो दिल पर दाघ हैं अपने
अभी तुम को दिखाते हैं
सुनू!
सकूँ नही आता के दिल बेठाब रहता हा
कभी तितली के कचे रंग
कभी जुगनू सटाते हैं
सुनू!
जब शाम होती हा
अंधारों से खफा हो कर
तेरी यादों के मंदिर मैं
चराघ-ए-शब जलते हैं
बुहुत खुद पे जाबर कर के
मोहब्बत का सफ़र कर के
बस एट्ना जान पाए हैं
मोहब्बत मार नही सकती
मोहब्बत मार डेटी हा…….
गुनहगार – Hindi Sex Novel – 16
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